बेगूसराय से कन्हैया आर या पार?कन्हैया और तनवीर की चुनावी जंग में जीत जाएंगे गिरिराज?

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कन्हैया , तनवीर और गिरिराज के बीच कांटे की टक्कर

लोकसभा का हॉट सीट बेगूसराय।बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय मुकाबला है यहां। कन्हैया कुमार , तनवीर हसन और गिरिराज सिंह के बीच ।बेगूसराय में चाहे जो जीते लेकिन यहां लोग इस बात का पूरा श्रेय दे रहे हैं कि कन्हैया कुमार के कारण शहर की चर्चा देश भर में हो रही है.बिहार के बेगूसराय सीट से कन्हैया कुमारका मुकाबला केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और राजद के तनवीर हसन से है. कन्हैया सीपीआई के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं.

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कन्हैयाकुमार , गिरिराज सिंह और तनवीर हसन का त्रिकोणीय मुकाबला

कन्हैया कुमार ने इस बीच फेसबुक पर पोस्ट लिखकर बीजेपी उम्मीदवार गिरिराज सिंह पर जमकर हमला बोला. कन्हैया ने फेसबुक पर लिखा, ‘भाजपा के जो उम्मीदवार बेगूसराय आना ही नहीं चाहते थे वे यह बता दें कि उन्होंने मंत्री होने के नाते इस जिले के उद्यमों के विकास के लिए क्या किया है? चुनावी मौसम में बेगूसराय का तापमान गर्म हो गया है।23 मई को नतीजा आपके सामने होगा।ऐसे मेंसबके मन मे एक बात उठ रही है कि कहीं कन्हैयाकुमार और तनवीर हसन की चुनावी जंग में गिरिराज यहां से जीत ना जाये।

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कन्हैया कुमार मोदी को हराना चाहते हैं, लेकिन बेगूसराय से ही क्यों??

कन्हैय्या कुमार मोदी को हराना चाहते हैं, लेकिन बेगूसराय से ही क्यों?? मोदी को हराना है , तो बनारस से चुनाव क्यों नहीं लड़ते??🤔बेगूसराय में भाजपा को हराने के लिए पहले से ही दमदार प्रत्याशी है, जिन्होंने 2014 के मोदी लहर में भी बीजेपी का पीछा नहीं छोड़ा था….😎

क्या कहते हैं आंकड़े

2014 के मोदी लहर में बेगूसराय लोकसभा से राजद प्रत्याशी तनवीर हसन ने बीजेपी प्रत्याशी का पीछा नहीं छोड़ा था, जब पूरा देश मोदी मय हुआ था तब तनवीर हसन को बेगूसराय की अवाम ने दिल खोलकर वोट किया था, 2014 में तनवीर हसन को 369892 वोट मिला था, जबकि बीजेपी के भोला सिंह को 428227 वोट मिला था, और वहीँ सीपीआई प्रत्याशी को महज़ 192369 वोट मिले थे ✍️चूँकि 2014 से ज़्यादा मज़बूत पोज़िशन इस बार है तनवीर हसन की, 2014 में बिना गठबंधन का चुनाव लड़ी थी राजद लेकिन इस बार कई पार्टियों का गठबन्धन है, जिनमे राजद, कांग्रेस, हम, RLSP और भी कई छोटी पार्टियां हैं, इस कारण तनवीर हसन का जातीय समीकरण भी बहुत मज़बूत है ✍️2004, 2009, या 2014 का रिकॉर्ड अगर आप देखें तो 2004 में सीपीआई कहीं से लड़ाई में थी ही नहीं, 2009 में सीपीआई दूसरे स्थान पर रही और फिर 2014 में तीसरे स्थान पर आ गई ✍️✍️

बेगूसराय में जातीय समीकरण

बेगूसराय में मुसलान वोटरों की तादाद लगभग तीन लाख है. यहां किसी एक जाति में भूमिहार सबसे बड़ा तबक़ा है. भूमिहार वोटर चार लाख से ज़्यादा हैं.भूमिहारों के बाद दलित वोटर सबसे ज़्यादा हैं. सरफ़राज़ का भी मानना है कि कन्हैया को अपनी जाति से बहुत ज़्यादा वोट नहीं मिलेगा.

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