आखिर चर्चा में क्यों है साध्वी प्रज्ञा सिंह

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कौन है साध्वी प्रज्ञा और आखिर चर्चा में क्यों छाई है साध्वी प्रज्ञा? तो सुनिए, मध्य प्रदेश की भोपाल लोकसभा सीट से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ बीजेपी ने साध्वी प्रज्ञा को चुनावी मैदान में उतारा है. साध्वी प्रज्ञा को टिकट मिलना इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि उनका नाम “मालेगांव कांड” समेत और भी आपराधिक मामलों से जुड़ा रहा है.भोपाल लोकसभा सीट पर BJP से उनका नाम घोषित होते ही चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया।राजनीतिक बयान बाजी का दौर शुरू हो चुका है।राजनीतिक गलियारों से बयानबाजीयों की झड़ी लग गयी है।

चर्चा में क्यों है साध्वी प्रज्ञा

गौरतलब है कि उनत्तीस सितंबर 2008 को महाराष्ट्र में “मालेगांव कांड” हुआ था, इसमें कई लोग चपेट में आये थे। करीब सौ से ज़्यादा लोग घायल हुए थे. सर्वविदित है कि इस केस में साध्वी प्रज्ञा समेत चौदह लोगों को आरोपी बनाया था. और 2017 में साध्वी प्रज्ञा को बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिली थी.इसलिए जब साध्वी का नाम भोपाल लोकसभा सीट के लिए घोषित हुआ तो चर्चाओं का बाजार चारो ओर गर्म हो गया है।सोशल मीडिया से लेकर प्रिंट मीडिया तक मे साध्वी की चर्चा हो रही है।

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दिग्विजय सिंह बनाम साध्वी प्रज्ञा

भोपाल लोकसभा सीट पर कांग्रेस की तरफ से दिग्विजय सिंह बीस अप्रैल को नामांकन दाखिल करने वाले हैं।वहीं खबर है कि साध्वी प्रज्ञा सिंह BJP की तरफ से तईस अप्रैल को भोपाल लोकसभा सीट के लिए नामांकन दाखिल करेंगी।भाजपा में एक से बढ़कर एक दिग्गज नेता हैं।प्रतिभाशाली नेताओं की कतार है भाजपा में।फिर ऐसा क्यों हुआ कि भोपाल के लिए साध्वी को चुना गया?आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी? जो संघ-भाजपा ने अपने तमाम नेताओं और दावेदारों को दरकिनार कर साध्वी प्रज्ञा पर भरोसा जताया है.भाजपा का यह फैसला कितना सही है इसका फैसला तो जनता करेगी।जनता ही बताएगी की वह भोपाल के लिए किसे चुनती है, साध्वी को या दिग्विजय सिंह को।बहरहाल मुकाबला दिलचस्प रहेगा।सबकी निगाहें भोपाल पर जमी रहेगी।

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कौन है साध्वी प्रज्ञा

साध्वी प्रज्ञा मध्यप्रदेश में ही जन्मी हैं इनका का जन्म मध्यप्रदेश के भिंड में हुआ था, साध्वी के पिता आर्युवेदिक डॉक्टर हैं. साध्वी प्रज्ञा के पिता डॉक्टरी के साथ,साथ संघ से भी जुड़े थे, जिस वजह से साध्वी का भी झुकाव संघ की तरफ हमेशा रहा. पढ़ाई के साथ ,साथ साध्वी राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ की छात्र ईकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ीं. धीरे-धीरे साध्वी की पहचान बढ़ी और उन्होंने विद्यार्थी परिषद छोड़कर साध्वी बनने का फैसला किया.इस तरह प्रज्ञा “साध्वी प्रज्ञा” बन गयी।

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